मध्य प्रदेश सरकार में हाल ही में कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इन फैसलों में सबसे महत्वपूर्ण और चर्चा में रहने वाला निर्णय उन बच्चों के लिए लिया गया जो कोविड-19 में अपने माता-पिता को खो चुके हैं और अनाथ हो गए हैं।
सरकार ने ऐसे बच्चों को ₹4000 की सहायता हर महीने अगले 5 साल तक देने का फैसला किया है। यह सुविधा वात्सल्य योजना के तहत प्रदान की जाएगी।
मिशन वात्सल्य योजना क्या है?
मिशन वात्सल्य योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य बच्चों के स्वस्थ और खुशहाल बचपन को सुनिश्चित करना और उनके विकास को बढ़ावा देना है। इस योजना के अंतर्गत बच्चों को संस्थागत और गैर-संस्थागत देखभाल सेवाएं दी जाती हैं। इसमें बाल देखभाल संस्थानों को सहायता देना, गोद लेने, प्रायोजन और देखभाल के बाद की सेवाएं शामिल हैं।
योजना का मुख्य लक्ष्य है बच्चों के अधिकारों की वकालत करना और उन्हें अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचाने में मदद करना।
मध्य प्रदेश सरकार का नया निर्णय
मध्य प्रदेश सरकार ने इस योजना के तहत पहले मिलने वाली ₹1000 की राशि को बढ़ाकर ₹4000 प्रति माह कर दिया है। यह राशि आने वाले 5 सालों तक बच्चों को दी जाएगी।
राज्य के कैबिनेट ने इस योजना के तहत गैर-संस्थागत देखभाल में रहने वाले बच्चों को प्रतिमाह ₹4000 की वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव पारित किया और उसे मंजूरी दी। यह सहायता उन बच्चों के लिए होगी जो पालक देखभाल, पश्चात देखभाल या फिर विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्त या गंभीर बीमारी से जूझ रही माताओं के साथ रह रहे हैं।
आसान भाषा में समझें तो, ऐसे बच्चे जो किसी संस्थान में नहीं रह रहे हैं बल्कि अपने परिवार या किसी गार्जियन के साथ रह रहे हैं, उन्हें यह राशि प्रतिमाह दी जाएगी।
योजना का लाभ और वित्तीय प्रावधान
माना जा रहा है कि इस योजना का सीधा फायदा उन 3346 बच्चों को मिलेगा जिन्होंने कोविड-19 में अपने माता-पिता को खो दिया।
मिशन वात्सल्य योजना के तहत मिलने वाली राशि में 60% योगदान केंद्र सरकार का होगा और 40% योगदान राज्य सरकार वहन करेगी। योजना के लिए ₹122 करोड़ का प्रावधान मंजूर किया गया है।
अन्य महत्वपूर्ण फैसले
मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत गैर-संस्थागत सेवा योजना और स्पॉन्सरशिप फास्टर केयर आफ्टर केयर को अगले 5 साल तक प्रदेश के समस्त जिलों में संचालित करने की स्वीकृति दी गई है।
इसके अलावा, बच्चों की उम्र 18 साल पूरी होने के बाद, जो बाल देखभाल संस्थान छोड़ेंगे, उन्हें आफ्टर केयर के माध्यम से रोजगार का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे आगे चलकर आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें।
कुल मिलाकर, इस योजना के तहत ऐसे बच्चे, जिनके माता-पिता नहीं हैं और जो परिवार के किसी सदस्य के साथ रह रहे हैं, या जिन्होंने पिता को खो दिया है और माता के साथ रह रहे हैं, या तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं के बच्चे, सभी इस योजना का लाभ प्राप्त करेंगे।
मध्य प्रदेश सरकार लगातार ऐसे बच्चों के लिए कई योजनाएं चलाती रहती है, जिससे कि उनका सुरक्षित पालन-पोषण और विकास सुनिश्चित हो सके।

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